Ad

paddy harvesting

जानिए धान कटाई की सबसे बेहतरीन और शानदार मशीन के बारे में

जानिए धान कटाई की सबसे बेहतरीन और शानदार मशीन के बारे में

फसलों की कटाई करने के लिए किसान कई तरह के महंगे उपकरण को अपनाते हैं। परंतु, छोटू रीपर मशीन बाजार में धान कटाई करने वाली सबसे सस्ती एवं जबरदस्त मशीन है। अपनी फसल की कटाई के साथ-साथ ज्यादा आमदनी कमा सकते हैं। फसलों की कटाई के लिए किसान बाजार से विभिन्न प्रकार के महंगे उपकरण खरीदते हैं। परंतु, वहीं छोटे व सीमांत किसान महंगे कृषि उपकरणों को खरीदने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं, जिसके चलते वह हसिया इत्यादि का उपयोग करते हैं। 

किसानों की इसी परेशानी को मंदेनजर रखते हुए तकनीकी क्षेत्र की कंपनियां भी किसानों के बजट के हिसाब से उपकरणों को तैयार करने लगी हैं। दरअसल, फसल कटाई में रीपर मशीन का नाम सबसे ज्यादा सुनने को मिलता है। बतादें, कि यह मशीन गेहूं, धान, धनिया एवं ज्वार की फसल की कटाई बेहद ही सुगमता से करती है। इस मशीन की विशेषता यह है, कि इसमें किसान ब्लेड बदलकर बाकी फसलों की कटाई भी सहजता से कर सकते हैं। भारतीय बाजार में फसल कटाई के लिए बहुत सारी रेंज की बेहतरीन मशीनें है, जो किसानों के लिए काफी किफायती है। सिर्फ यही नहीं किसान इन मशीनों को घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से भी खरीद सकते हैं। 

छोटू रीपर मशीन की कीमत काफी किफायती होती है

फसल की कटाई के लिए छोटू रीपर मशीन का इस्तेमाल किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है। बतादें, कि इस मशीन से चना, सोयाबीन और बरसीम की फसल की कटाई बड़ी ही सुगमता से की जा सकती है। यह मशीन तकरीबन 1 फुट तक के पौधे की कटाई सहजता से कर सकती है। साथ ही, इस मशीन के इंजन की बात की जाए, तो इसमें 50cc का 4 स्ट्रोक इंजन दिया गया है। इसके साथ-साथ इसमें इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले के जरिए अन्य जानकारी किसानों को प्रदान की जाती है।

ये भी पढ़ें:
खरीफ की फसल की कटाई के लिए खरीदें ट्रैक्टर कंबाइन हार्वेस्टर, यहां मिल रही है 40 प्रतिशत तक सब्सिडी
 

छोटू रीपर मशीन वजन में काफी हल्की होती है। बतादें, कि इसका कुल वजन ही 8-10 किलो ग्राम तक है। अगर हिसाब किताब लगाया जाए तो इस मशीन से गेहूं फसल की कटाई करने पर 4 गुना तक मजदूरी कम लगती है। साथ ही, इस मशीन में ईंधन की खपत की मात्रा ना के बराबर होती है। खेत में छोटू रीपर मशीन से प्रति घंटे 1 लीटर से भी कम तेल की खपत होती है। इस मशीन में किसान ब्लेड बदलकर भी बाकी फसलों की सुगमता से कटाई कर सकते हैं। देखा जाए तो ज्यादा दांत वाले ब्लेड का उपयोग मोटे और कड़े पौधों की कटाई करने के लिए किया जाता है। 

छोटू रीपर मशीन के माध्यम से बेहतरीन कमाई होगी

यदि आप इस मशीन का उपयोग किसान के किसी दूसरे खेत में भी करते हैं, तो इससे प्रति दिन अच्छी आय की जा सकती है। प्राप्त हुई जानकारी के मुताबिक, छोटू रीपर मशीन का किराया एक बीघा खेत के लिए 300 रुपए तक है। वहीं, यदि आप एक दिन में 1 एकड़ खेत की फसल कटाई करते हैं, तो दिन में आप 1500 से 1800 रुपए की आसानी से कमाई कर सकते हैं। साथ ही, इस मशीन के अंदर 1 बीघा खेत में न्यूनतम आधा लीटर डीजल लगता है। इसके अतिरिक्त इसके मेंटीनेंस इत्यादि का खर्च निकालकर आपकी आमदनी से 200-300 रुपए की बचत होती है। अब इस तरह से यह मशीन किसानों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराती है।

खरीफ सीजन में बासमती चावल की इन किस्मों की खेती से होगी अच्छी पैदावार और कमाई

खरीफ सीजन में बासमती चावल की इन किस्मों की खेती से होगी अच्छी पैदावार और कमाई

भारत भर में बासमती धान का उत्पादन किया जाता है। देश के विभिन्न राज्यों में विभिन्न किस्म का बासमती चावल उगाया जाता है। परंतु, कुछ ऐसी भी प्रजातियां हैं, जिनके उत्पादन हेतु हर प्रकार का मौसम और जलवायु उपयुक्त होता है। 

इस बार जून के पहले हफ्ते में मानसून की शुरुआत होगी। इसके उपरांत संपूर्ण भारत में किसान धान की बुवाई करने में लग जाएंगे। दरअसल, किसानों ने धान की नर्सरी को तैयार करना चालू कर दिया है। 

यदि किसान भाई बासमती धान का उत्पादन करने की योजना बना रहे हैं, तो उनके लिए यह अच्छी खबर है। क्योंकि, आगे इस लेख में हम आपको बासमती धान की सदाबहार प्रजतियों के विषय में जानकारी देने वाले हैं। 

इन किस्मों से खेती करने पर रोग लगने का खतरा भी बहुत कम रहता है। साथ ही, काफी बेहतरीन पैदावार भी मिलती है।

बासमती चावल का उत्पादन पूरे देश में किया जाता है

ऐसे तो बासमती चावल की खेती पूरे भारत में की जाती है। लेकिन, भिन्न-भिन्न राज्यों में वहां की मृदा-जलवायु हेतु अनुकूल भिन्न-भिन्न किस्म का बासमती चावल उगाया जा सकता है। 

हालाँकि, कुछ ऐसी भी प्रजातियां मौजूद हैं, जिनका उत्पादन हर प्रकार के मौसम एवं जलवायु में आसानी से किया जा सकता है। इन किस्मों के ऊपर झुलसा रोग का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। 

साथ ही, फसल की लंबाई कम होने की वजह से तेज हवा बहने पर भी यह वृक्ष नहीं गिरते हैं। अब ऐसी हालत में किसानों की कीटनाशकों पर आने वाली लागत में राहत मिलेगी एवं धान में पोष्टिकता भी बनी रहेगी। इसकी वजह से बाजार में समुचित भाव प्राप्त होगा। 

ये भी देखें: धान की किस्म पूसा बासमती 1718, किसान कमा पाएंगे अब ज्यादा मुनाफा

पूसा बासमती-6 (पूसा- 1401):

पूसा बासमती-6 धान की एक सिंचित किस्म है। मतलब कि यह प्रजाति बारिश से ही अपने लिए जल की आवश्यकता को पूरा कर लेती है। यह बासमती की एक बौनी प्रजाति है। 

इसकी फसल की लंबाई परंपरागत बासमती की तुलना में बेहद कम होती है। ऐसी हालत में तीव्र हवा चलने पर भी इसकी फसल खेत में नहीं गिरती है। 

इसकी उत्पादन क्षमता 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। यदि किसान भाई इसकी खेती करेंगे को उनको काफी ज्यादा उत्पादन प्राप्त हो सकेगा।

उन्नत पूसा बासमती-1 (पूसा-1460):

उन्नत पूसा बासमती-1 भी पूसा बासमती-6 की ही भाँती एक सिंचित बासमती धान की प्रजाति है। इसकी फसल 135 दिन के समयांतराल में ही पककर तैयार हो जाती है। 

इसका अर्थ यह है, कि 135 दिन के उपरांत किसान भाई इसकी कटाई कर सकते हैं। इसमें रोग प्रतिरोध क्षमता काफी ज्यादा पाई जाती है। 

अब ऐसी हालत में इसके ऊपर झुलसा रोग का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यदि पैदावार की बात करें तो, आप एक हेक्टेयर से 50 से 55 क्विंटल धान की पैदावार कर सकते हैं। 

ये भी देखें: पूसा बासमती चावल की रोग प्रतिरोधी नई किस्म PB1886, जानिए इसकी खासियत

पूसा बासमती-1121:

पूसा बासमती- 1121 का उत्पादन आप किसी भी धान की खेती वाले भाग में कर सकते हैं। यह बासमती की एक सुगंधित प्रजाति है। जो कि 145 दिन के समयांतराल में पककर तैयार हो जाती है। 

इसके चावल का दाना पतला एवं लंबा होता है। खाने में यह बेहद स्वादिष्ट लगती है। इसकी उत्पादन क्षमता 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसके अलावा यदि किसान भाई चाहें, तो पूसा सुगंध-2, पूसा सुगंध-3 और पूसा सुगंध-5 की भी खेती कर सकते हैं। 

इन किस्मों की खेती करने हेतु पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर का मौसम उपयुक्त है। यह किस्में तकरीबन 120 से 125 दिन के समयांतराल में पककर तैयार हो जाती हैं। साथ ही, एक हेक्टेयर जमीन से 40 से 60 क्विंटल उत्पादन मिल सकता है।

धान उत्पादक किसान ने महज 45 दिन के अंदर अगस्त माह में ही धान की कटाई कर मिशाल पेश की

धान उत्पादक किसान ने महज 45 दिन के अंदर अगस्त माह में ही धान की कटाई कर मिशाल पेश की

किसान संजय सिंह का कहना है, कि जायद सीजन में धान की खेती करना किसान भाइयों के लिए काफी लाभकारी रहेगा। क्योंकि इस सीजन में खेती करने पर जल की बर्बादी नहीं होती है। बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है। यहां पर जुलाई के अंतिम सप्ताह तक कई किसान धान की रोपाई ही कर रहे थे। परंतु, आज हम आपको एक ऐसे किसान से मिलवाएंगे, जिन्होंने अगस्त माह में ही धान की कटाई चालू कर दी। मुख्य बात यह है, कि इन्होंने एक एकड़ भूमि में इंडिया गेट धान की खेती की थी। इससे लगभग 16 क्विंटल के आसपास इंडिया गेट धान की पैदावार हुई है। वर्तमान में इस किसान की चर्चा संपूर्ण जनपद में हो रही है। वे लोगों के लिए एक नजीर बन गए हैं। समीपवर्ती क्षेत्रों के किसान इनसे खेती के गुण सीखने आ रहे हैं।

धान उत्पादक किसान संजय सिंह कहाँ के मूल निवासी हैं

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि संजय सिंह कैमूर जनपद के बगाढ़ी गांव के निवासी हैं। उन्होंने एक एकड़ भूमि में गरमा धान का उत्पादन किया था। विशेष बात यह है, कि संजय सिंह विगत दो वर्ष से इंडिया गेट धान का उत्पादन कर रहे हैं। परंतु, इस बार उन्होंने जायद सीजन में इसकी खेती करने का निर्णय किया और उन्हें काफी हद तक इसमें सफलता भी प्राप्त हुई। संजय सिंह ने बताया है, कि गरमा धान की खेती करने में खरीफ सीजन की तुलना में कम खर्चे हुए। साथ ही, पानी की बर्बादी भी काफी कम हुई है। वे धान की बेहतरीन पैदावार से काफी उत्साहित हैं। उन्होंने बताया है, कि आगामी वर्ष वे 10 एकड़ में धान की खेती करेंगे।

ये भी पढ़ें:
पूसा बासमती 1692 : कम से कम समय में धान की फसल का उत्पादन

फसल केवल 45 दिन के अंदर पककर तैयार हो गई

संजय सिंह ने बताया है, कि गरमा धान की खेती करने का विचार उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर से मिला है। वहां पर उन्होंने किसानों को जायद सीजन में धान की खेती करते हुए पाया। इसके पश्चात उन्होंने अपने गांव में आकर गरमा धान की खेती चालू कर दी। उन्होंने बताया कि अप्रैल माह में इंडिया गेट धान की नर्सरी तैयार करने के लिए बुवाई की थी। साथ ही, मई माह के अंतिम सप्ताह में इसकी रोपाई की गई। संजय सिंह की माने तो केवल 45 दिन में ही फसल पककर तैयार हो गई थी। परंतु, बारिश के कारण इसकी कटाई करने में 20 दिनों का विलंभ हुआ। इसकी वजह से अगस्त माह में धान काटना पड़ा।

चावल विक्रय कर एक लाख रुपये तक की आमदनी कर सकते हैं

किसान संजय सिंह ने बताया है, कि जायद सीजन में महज दो बार ही धान की फसल की सिंचाई करनी होती है, जिससे कि खेत के अंदर नमी बनी रहे। साथ ही, खेती के ऊपर खर्चा भी कम आता है। उनके बताने के अनुसार जायद सीजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है, कि मात्र 45 से 50 दिनों में ही फसल पूर्णतय पककर तैयार हो जाती है। इस प्रकार धान की फसल को तैयार होने में करीब 130 से 140 दिन लग जाते हैं। उन्होंने बताया है, कि 16 क्विंटल धान में लगभग 11 क्विंटल तक चावल का उत्पादन होगा। वर्तमान में 1000 रुपये में 10 किलो इंडिया गेट चावल आ रहा है। इस प्रकार वे 1100 किलो चावल बेचकर एक लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी कर सकते हैं।